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Samastipur News:स्वतंत्रता दिवस पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंजा अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय का सभागार

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Samastipur News | स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर समस्तीपुर के अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में 13 चयनित समूहों ने नृत्य, गायन, लोकनृत्य और कथक की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।

समस्तीपुर, 15 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर समस्तीपुर शहर स्थित अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय का सभागार शनिवार को देशभक्ति, भारतीय संस्कृति और लोक कला के रंगों से सराबोर नजर आया। जिला प्रशासन की ओर से आयोजित सांस्कृतिक समारोह में विद्यालयों और विभिन्न डांस अकादमियों से चयनित 13 समूहों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में बच्चों और कलाकारों की प्रतिभा के साथ भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की विविधता भी देखने को मिली।

कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ अनुमंडल पदाधिकारी, सदर समस्तीपुर राकेश कुमार, डीपीओ स्थापना जमालुद्दीन, डीपीओ सर्व शिक्षा अभियान शुभम कसौधन, डीपीओ मध्यान भोजन योजना प्रेम शंकर झा और जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी जूही कुमारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। दीप प्रज्वलन के बाद सभागार में मौजूद लोगों के बीच स्वतंत्रता दिवस के उत्साह का माहौल और गहरा हो गया।

समारोह में सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों के साथ विभिन्न डांस अकादमियों से चुने गए प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। किसी समूह ने देशभक्ति गीतों पर नृत्य पेश किया तो किसी ने सामूहिक गायन के माध्यम से राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। लोकनृत्य की प्रस्तुतियों में बिहार सहित देश की लोक परंपराओं की झलक दिखाई दी। वहीं कथक की प्रस्तुति ने शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों और भारतीय कला की समृद्ध परंपरा को मंच पर जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम के दौरान एक के बाद एक प्रस्तुतियां होती रहीं और सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। प्रतिभागी बच्चों की ऊर्जा और आत्मविश्वास ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। सांस्कृतिक कार्यक्रम में केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा संदेश भी दिखाई दिया।

आयोजकों के अनुसार, ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर देते हैं। पढ़ाई के साथ संगीत, नृत्य और कला जैसी गतिविधियों से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी संस्कृति तथा परंपरा से भी जुड़ते हैं। स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसर इन गतिविधियों को राष्ट्रप्रेम की भावना के साथ जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।

समापन अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी राकेश कुमार ने प्रतिभागियों और कार्यक्रम से जुड़े शिक्षकों तथा आयोजकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों की छिपी प्रतिभा को सामने लाने के साथ उन्हें अपनी संस्कृति और परंपरा से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दिन देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को याद करने का अवसर है। आज की पीढ़ी को स्वतंत्रता के मूल्यों को समझते हुए देश की एकता, अखंडता और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

मंच संचालन प्रधानाध्यापक अनंत कुमार राय ने किया। कार्यक्रम को व्यवस्थित और सफल बनाने में शिक्षा विभाग के संभाग प्रभारी हरिश्चंद्र राम, सुनील कुमार, संगीत शिक्षक मंगलेश कुमार, अनुज कुमार, डॉली मिश्रा, सुभीत कुमार सिंह ‘बिट्टू’ सहित अन्य पदाधिकारियों, शिक्षकों और कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

समारोह ने यह संदेश भी दिया कि राष्ट्रीय पर्व केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं हैं। जब इनमें बच्चों की प्रतिभा, लोक संस्कृति, शास्त्रीय कला और देशभक्ति को जोड़ा जाता है तो इसका प्रभाव समाज और नई पीढ़ी पर अधिक व्यापक होता है। समस्तीपुर में आयोजित यह सांस्कृतिक समारोह भी इसी भावना का उदाहरण बना, जहां मंच पर देशभक्ति के साथ भारतीय संस्कृति की विविध छवियां दिखाई दीं।

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नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने की पहल

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अहमियत केवल मंचीय प्रस्तुति तक सीमित नहीं है। ऐसे आयोजन बच्चों को यह समझने का अवसर देते हैं कि देश की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि उसकी भाषाओं, लोक परंपराओं, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक विविधता से भी बनती है। समस्तीपुर के अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में अलग-अलग विधाओं की प्रस्तुतियां इसी विविधता को सामने लाती दिखीं।

विद्यालय स्तर पर बच्चों को कला और संस्कृति से जोड़ना उनके व्यक्तित्व विकास में भी उपयोगी साबित होता है। मंच पर प्रस्तुति देने से उनमें आत्मविश्वास आता है, समूह में काम करने की भावना विकसित होती है और अपनी विरासत को समझने का अवसर मिलता है। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर इन प्रयासों को देशप्रेम की भावना से जोड़ने का काम करते हैं।

ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से प्रोत्साहित किया जाए तो ग्रामीण और छोटे शहरों के प्रतिभाशाली बच्चों को भी अपनी कला दिखाने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। कई बार प्रतिभा मौजूद होती है, लेकिन मंच और मार्गदर्शन की कमी के कारण वह सामने नहीं आ पाती। इसलिए स्कूलों, प्रशासन और सांस्कृतिक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय से नई पीढ़ी की रचनात्मक क्षमता को आगे बढ़ाया जा सकता है।

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